Group-II Recruitments mein bada mod — High Court ne Final Selection List ko radd kiya

Group-II niyamakon mein bada mod — High Court ne Final Selection List ko radd kiya

Group-II recruitment ko leke saalon se chal rahi uljhan ke beech Telangana High Court ne ek aham faisla sunaya. Court ne re-evaluation ke natije aur Telangana Public Service Commission (TGPSC) dwara jaari ki gayi final selection list ko poori tarah  radd kar diya hai. Is faisle se dobara sarkari bharti prakriyaon mein transparency par charcha phir se shuru ho gayi hai.

Mudda kya hai?

P. Prasanna Latha, Bokku Sujatha aur kul mila kar 23 applicants ne court mein petitions daakhil kiye the. Unka kehna tha ki TGPSC ne  tampered OMR sheets  ko evaluation mein shamil karke galat aur anyaayik final list jari ki. Petitioners ne submitted proof se dikhaya ki kuch OMR sheets par white-out, rubber marks aur dusre alterations hain. Court ne in aropo ko gambhir mana aur applicants ki baat maan li.

OMR tampering hi mukhya vivid

Court ne paaya ki kai OMR answer sheets (jinme 150 questions the) par clear tampering nazar aa raha tha — white-out ke nishaan, erase marks aur manually badle gaye answers. Pehle hi Division Bench ne technical committee ki salahiyat ke anuroop in tampered sheets ko evaluate na karne ko kaha tha, lekin TGPSC ne woh adesh follow nahi kiya. Court ne ye process anyaayik aur asamanjashpoorn bataya.

 Court ke nirdesh (Directions)

 Justice Nagesh Bheemapaka ne TGPSC ko kuch spasht nirdesh diye:

  • Naya re-evaluation karein: Technical Committee ki recommendations aur niyamon ka sakht paalan karte hue phir se OMR evaluation karein.
  •  Nayi selection list release karein: Sirf naye re-evaluation ke adhar par hi final selection list taiyar karke jari ki jaye.
  •  8 hafton mein appointment orders: Jo candidates eligible hon unko 8 hafton (do mahine) ke andar appointment orders diye jayein.
  •  Aane wali recruitments mein sakht niyantran:  Bhavishya mein hone wali sabhi recruitments mein OMR evaluation ki existing rules ko strictly follow karna zaroori hoga.

 Prabhav aur arth (Impact)

 Ye faisla un hazaaron candidates ko seedha prabhavit karega jo 30 December 2015 ke Group-II notification ke liye apply kiye the aur jo aakhirkaar final list ka intazaar kar rahe the. Re-evaluation se kuch candidates ko naya mauka mil sakta hai, jabki pehle select hue kuch logon ki sthiti ab ashtir ho sakti hai. Is faisle ne sarkari bharti prakriyaon mein transparency, technical integrity aur kanooni maryada par dobara sawal uthaya hai. 

  ग्रुप-II नियुक्तियों में बड़ा मोड़हाई कोर्ट ने फाइनल सेलेक्शन लिस्ट रद्द की

 

ग्रुप-II भर्ती प्रक्रिया में वर्षों से चली रही विवादों के बीच तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने पुनर्-मूल्यांकन (re-evaluation) के नतीजों तथा तेलंगाना पब्लिक सर्विस कमीशन (TGPSC) द्वारा जारी की गई अंतिम चयन सूची को पूरी तरह **रद्द** कर दिया है। इस निर्णय से सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता पर फिर से बहस छिड़ गई है।

 विवाद की जड़ क्या है?

 पी. प्रसन्नलता, बॉक्कु सुजाता सहित कुल 23 आवेदकों ने याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि TGPSC ने  टैम्पर्ड OMR शीट्स का मूल्यांकन कर गलत अन्यायपूर्ण अंतिम सूची जारी की। याचिकाकर्ताओं ने ऐसे प्रमाण प्रस्तुत किए जिनसे कुछ OMR शीटों पर वाइट-आउट, रबर के निशान एवं संशोधन स्पष्ट दिखाई दिए। अदालत ने इन दावों को गंभीरता से लिया और याचिकाकर्ताओं के तर्कों को स्वीकार किया।

 OMR शीट्स में छेड़छाड़ ही मुख्य मुद्दा

 अदालत ने पाया कि कई OMR उत्तर पत्रक (जिनमें 150 प्रश्न थे) पर स्पष्ट रूप से छेड़छाड़ के चिन्ह मौजूद थेवाइटनर के निशान, मिटाने के निशान और मैन्युअल रूप से बदले गए उत्तर। इससे पहले एक डिवीजन बेंच ने टेक्निकल कमेटी की सिफारिशों के अनुसार टैम्पर्ड शीट्स का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया था, परंतु TGPSC ने उन निर्देशों का पालन नहीं किया। अदालत ने इसे अन्यायपूर्ण और असंगत करार दिया।

 अदालत के निर्देश

  •  जस्टिस नागेश भीमपाका ने TGPSC को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए:
  •   नया पुनर्-मूल्यांकन अनिवार्य है। टेक्निकल कमेटी की सिफारिशों और नियमों का सख्ती से पालन करते हुए OMR का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
  •  नई चयन सूची जारी की जाए। केवल पुनर्-मूल्यांकन के आधार पर नई फाइनल लिस्ट तैयार और प्रकाशित की जाए।
  •  आठ सप्ताह में नियुक्तियाँ दी जाएँ। योग्य आवेदकों को 8 हफ्तों के भीतर नियुक्ति आदेश जारी किए जाएँ।
  •  आगे की भर्तियों में कड़े नियम लागू हों। भविष्य की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में OMR मूल्यांकन संबंधी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

 प्रभाव और निहितार्थ

 यह आदेश उन हजारों आवेदकों को सीधे प्रभावित करेगा जिन्होंने 30 दिसंबर 2015 के ग्रुप-II नोटिफिकेशन के अंतर्गत आवेदन किया था और जो वर्षों से अंतिम सूची का इंतजार कर रहे थे। पुनर्-मूल्यांकन से कुछ आवेदकों को नया अवसर मिल सकता है जबकि पहले चयनित कुछ की स्थिति अस्थिर हो सकती है। इस निर्णय ने सरकारी भर्ती प्रणालियों में पारदर्शिता, तकनीकी सक्षमता और कानूनी प्रमाणिकता पर महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दिया है।

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